हाथरस कांड में अमन-चैन बिगाड़ने की साजिश करने वालों के खिलाफ पुलिस ने 19 मुकदमे दर्ज किए हैं। पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी सोमवार शाम एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने दी। उन्होंने हाथरस की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में अमन-चैन बिगाड़ने और जातीय विद्वेष फैलाकर दंगे कराने की साजिश में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
एडीजी ने बताया कि इस संबंध में हाथरस के चंदपा थाने में आईपीसी व आईटी एक्ट की 20 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा अलग-अलग मामलों में हाथरस के चंदपा, सासनी व हाथरेस गेट थाने में भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। लखनऊ, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, प्रयागराज व अयोध्या में भी 13 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। मथुरा में कैम्पस फ्रंट आफ इंडिया के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं उनके 3-4 अन्य पदाधिकारियों को सीआरपीसी की धारा 151 के तहत निरुद्ध किया गया है। एडीजी ने कहा कि पीड़िता और उसके भाई के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज करते हुए सभी आरोपितों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश भी की है।
उनका दावा है कि कुछ संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा प्रदेश में जातीय एवं सांप्रदायिक हिंसा फैलाने और सरकार की छवि खराब करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया के प्लेटफार्मों पर पीड़ित परिवार को भड़काया गया। साथ ही भ्रामक व द्वेषपूर्ण सूचनाओं को प्रसारित करते हुए उन्माद फैलाने का प्रयास भी किया जा रहा है।
एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने मीडिया को बताया कि साजिश के तहत पूरे प्रदेश में अमन-चैन बिगाड़ने व जातीय विद्वेष फैलाने के उद्देश्य से पीड़ित परिवार को धमकाने, गलतबयानी करने के लिए दबाव बनाने और उन्हें 50 लाख रुपये का प्रलोभन देने आदि के संबंध में वायरल आडियो व फोटो को सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचारित किया गया। ऐसे तत्वों के विरुद्ध हाथरस के चंदपा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। हाथरस की सासनी कोतवाली और हाथरस गेट थाने में रविवार को दो अलग-अगल मुकदमे दर्ज किए गए थे। सासनी कोतवाली में राजनीतिक पार्टी के नेता एवं उनके 400-500 समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हाथरस गेट थाने में 200 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।
एफआईआर में निशाने पर मीडिया
पीड़िता के भाई से संपर्क कर उसके माता-पिता से यह कहलवाने का प्रयास किया गया कि शासन-प्रशासन की कार्यवाही से वह संतुष्ट नहीं हैं। इसके अलावा यह भी कहलवाने का प्रयास किया गया कि मृतका ने परिजनों से गैंगरेप की बात बतायी थी, जबकि प्रथमत: दी गई तहरीर व बयानों में मृतका व उसके परिजनों द्वारा मात्र मारपीट की बात की गई थी।
एक नेता ने भड़काया पूरा परिवार
एक अज्ञात नेता ने, जिसकी ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, ने पीड़िता के परिवार की रिश्तेदार महिला से उन पर दवाब डलवाया कि वे सरकार द्वारा दी जा रही 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता को अस्वीकार कर अंसतुष्टि जाहिर करते रहें, तथा किसी भी हाल में फैसला न कर लें। इसके लिए उन्हें 50 लाख रुपये का प्रलोभन दिया गया।